September 7, 2020

आज का युवा (मेरी पहली हिन्दी किताब)

By अभय रंजन

मेरा काम ऐसा है कि मुझे युवाओं के साथ संबंध संवाद स्थापित करने का भरपूर मौका मिलता है, उनकी मनोदशा, धारणा और हालात को समझने का अवसर मिलता है

क्योंकि मैं डिजिटल मार्केटिंग के स्किल सिखाता हूं और तकरीबन सभी जगह मैं सबसे ऊपर दिखता हूं, तो इसके संदर्भ में मुझे बहुत सारे युवाओं का फोन आते रहता है, यह मेरे लिए बेहतरीन अनुभव है क्योंकि मुझे यह जानने का अवसर मिलता है कि आज का युवा क्या सोच रहा है?

आपने तो यह सुना ही होगा किसी भी देश के विकास में युवाओं का भरपूर योगदान होता है और इस पर तो यहां तक कहा गया है कि किसी देश की हालत जानना हो तो वहां के युवा की हालत जान लीजिए

यह बिल्कुल सत्य बात है और यह वाकई में सोचने की बात है

अब अगर विकसित देश के साथ भारत (जो अभी भी विकासशील के श्रेणी में है) की तुलना की जाए तो शायद यह बात आसानी से समझा जा सकता है

विकसित देशों के युवा भारत के युवाओं के जैसा अपने मां-बाप पर ज्यादा दिनों तक बोझ बनकर नहीं रहते हैं, सेकेंडरी एजुकेशन के बाद ही काम करना शुरू कर देते हैं (जिसे इंटर्नशिप कहा जाता है)

पर भारत में तो अलग ही प्रथा है यहां तो लोग जब तक नहीं जगते जब तक पानी सर के ऊपर से ना निकल जाए, मां-बाप के ढाबा में उनका खाता कई दिनों तक खुला रहता है

जबकि, हमारे देश के युवा में इतना प्रतिभा है की अगर वे चाहे तो कुछ भी कर सकते हैं, बस थोड़ी सी सोच और धारणा बदलने की ज़रूरत हैं, मैं आगे इस पर बात किया हूँ

बाकी का भाग मेरी किताब में पढ़ने को मिलेगा जो जल्द ही Amazon पर आने वाली हैं

बने रहे