March 1, 2020

फल वाले की प्रेरणादायक कहानी

By अभय रंजन

एक वाक्या आप लोगों के साथ साझा करने का मन कर रहा था, समय के अभाव के कारण थोड़ी सी देरी हो गई

30 साल का होने वाला हूं सोचता हूं कि इसके बाद काम करने का जरूरत नहीं पड़े, इसलिए आजकल बहुत ज्यादा मेहनत कर रहा हूं

इसलिए आजकल हिंदी लेख ज्यादा नहीं लिख पाता हूं, हालांकि यह मेरा सबसे पसंदीदा काम है

हुआ यूं कि, मैं ऑफिस से जल्दी काम निपटा कर लौट रहा था, रास्ते में एक फल का ठेला है, जहाँ से संभवत प्रत्येक दिन फल खरीदता हूं

मैंने अपने जीवन में एक अच्छी आदत पाल रखा है, मैं बाज़ारु चीज बिल्कुल नहीं खाता और उन्हीं पैसों का मैं फल खरीद लेता हूं, इससे मेरी सेहत और नीयत दोनों स्वस्थ रहती है

और मैं यह आज के युवा को भी सुझाव देना चाहता हूं कि वह भी अपने शरीर का बेहतर ख्याल रखें , जितना हो सके बाहर की चीजों का सेवन कम करें, प्राकृतिक चीजों का सेवन ज्यादा करें

यू तो बस फल खरीद के वहां से निकल देता हूं, लेकिन आज समय ज्यादा मिल गया था इसलिए फल वाले से बात करने लगा

पता नहीं क्यों, लेकिन अक्सर लोग मुझसे बहुत जल्द जुड़ जाते हैं, मेरा भी कोशिश रहता है कि ताली दोनों हाथ से बजे, इसलिए मैं सामने वाला का पूरा सम्मान करता हूं

बात दिल्ली के माहौल से शुरू हुई और परिवार पर आकर खत्म हुई

पपीता जो अक्सर मुझे ₹30 किलो देते थे, आज ₹40 का लगाएं

तो मैंने पूछा कि भैया आज महँगा कैसे?

उन्होंने कहा कि – भैया मंडी से ही भाव ज्यादा आया है

तो मैंने उनसे मजाक में ही कहा कि गरीब आदमी को फल नहीं खाने दीजिएगा, भाव बढ़ा देते हैं

उन्होने बहुत दबी हुई भाव से मुझसे कहा कि भैया गरीब आदमी फल कहां खाता है, मुझे देख लीजिए ₹10 का एक फल खाने में भी 10 बार सोचता हूं

मैने बोला – क्यों आपके सामने तो फलों का भंडार रहता है

उन्होंने कहा कि भैया अगर मैं ही खा जाऊंगा तो पैसे कैसे आएंगे और इस महंगाई भरे जमाने में अपना पूरा परिवार को कैसे चलाऊंगा, खर्चा बहुत है, बाल-बच्चे, मां-बाप सब है, कमाने वाला मैं ही अकेला हूं

मैंने पूछा कि – मां-बाप भी आपके साथ ही रहते हैं

उन्होने कहा  – जी हां

बुढ़ापा में कौन उनको गांव में ऐसे ही पड़े रहने के लिए छोड़ दें इसलिए उनको अपने साथ ही रखता हूं

यह बात सुनकर मेरे अंदर जैसे कोई करंट दौड़ गया हो

मैने अक्सर देखा हैं की लोग अपना जीवन बनाने या पैसे बनाने या अपने बाल बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए अपने घर को छोड़कर बाहर शहर की ओर आते हैं

लेकिन बहुत कम लोग जो अपने मां-बाप को साथ रखते हैं

मैं भी उनमें से एक हूं

(मेरे साथ यह संभव इसलिए नहीं है क्योंकि मेरे मां-पिताजी दोनों नौकरी में लगे हैं इसलिए मुझे उनका सेवा करने का सौभाग्य नहीं मिलता है लेकिन मेरी धर्मपत्नी इसको बहुत खूब तरीके से निभा रही है)

बात और आगे तक गई

मैं भी थोड़ा सा उनके मुख से ऐसी बातें सुनकर काफी प्रभावित हुआ, उनके प्रति जो आदर और सम्मान का भाव था वह काफी बढ़ गया

मैंने अंदर ही अंदर प्रण लिया की आगे से इनके साथ कोई मोलभाव नहीं करूँगा

एक बात जिक्र करना चाहता हूं कि हम लोग मॉल या बड़ी-बड़ी ब्रांड का सामान लेने में ₹1 का मोलभाव नहीं करते हैं, एमआरपी पर ही सामान खरीद के चले आते हैं लेकिन जब सब्जी या फल वाला या किसी छोटे दुकानदार के पास सामान खरीदने जाते तो उनसे पूरा मोलभाव करते हैं

जहां फर्क नहीं पड़ता वहां तो एक प्रश्न नहीं करते हैं और जो अपने जीवन से रोज़ जूझ रहा है उनके साथ हम लोग मोलभाव करके उनकी परिस्थिति को और नाजुक करते हैं

हमें इस पर विचार करना चाहिए

मैंने कहा – भैया बहुत श्रेष्ठ काम कर रहे हैं, आज के जमाने में अपने मां-बाप को साथ रखकर उनका सेवा करना इससे बड़ा ना तो कोई धर्म है और ना ही कोई काम

उन्होंने कहा – अगर यह भी नहीं करूंगा तो जीवन व्यर्थ है

एक फल वाले से ऐसी बिचारपूर्ण बात की उम्मीद नहीं थी लेकिन उन्होने यह साबित कर दिया की अच्छा सोचने के लिए पढ़ा लिखा होना जरूरी नही होता

एक दूसरे को मुस्कुराते हुए देखकर मैंने अपनी बाइक स्टार्ट करके अपने घर की तरफ चल दिया

घर आकर सबसे पहले अपने पत्नी को फोन किया और उसको यह सारी बात समझाया, उसने भी मेरी यह सारी बातों को ध्यान से सुना और अपनी सहमति जताई और बोली कि यह तो होना ही चाहिए

सच बता रहा हूं इस धरती पर सबसे बड़ा पुण्य अपने मां बाप का सेवा में ही निहित है

माता-पिता ki khani

कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका बैंक बैलेंस कितना है अगर आपके मां-बाप आपके साथ बैठ कर दो रोटी नहीं खा पा रहे हैं

आपके रेस्टोरेंट में ली गई सेल्फी का कोई मोल नहीं है अगर आपके घर पर मां बाप को ही सूखी रोटी और सब्जी का सेवन कर रहे हैं

बहुत बिचारपूर्ण बात है, आज के युवा को इस पर थोड़ा सा अमल करना चाहिए, पहला कर्तव्य मां-बाप की सेवा होनी चाहिए, बाद में कैरियर, जॉब या अन्य

ऐसे तमाम धनी व्यक्तित्व के लोगों को मैं सलाम करता हूं जिन्होंने इस धरती का बैलेंस को बनाए रखा है

हमारे दर्शक वर्ग से यही उम्मीद करूंगा कि इनसे कुछ सीखें

आगे ऐसे कुछ प्रेरणादायक वाक्या आपके बीच में लाते रहूंगा

और हां दोस्तों, इस माह के आखिर तक मैं अपनी पहली हिंदी किताब “आज का युवा” प्रकाशित करने जा रहा हूँ, आपका सहयोग और आशीर्वाद कायम रहे ऐसा उम्मीद करता हूँ

जय हिंद