April 2, 2020

राम – मेरे नज़र से

By अभय रंजन

आज रामनवमी है, भगवान राम के जन्म पर मनाने जाने वाला हिंदुस्तान का “हिंदू पर्व”

मुझे भारत में भगवान श्रीराम का परिचय देने की जरूरत नहीं दिखती लेकिन मैं राम के वह सारे चरित्र का उल्लेख जरूर करना चाहूंगा जो उन्हें “पुरुषोत्तम राम” बनाता है

आज के दौर में शायद इसे समझना बेहद जरूरी है राम सिर्फ़ रामायण का एक पात्र नहीं है

यह संपूर्ण भारत का आस्था का केंद्र है

राम एक धर्म है, राम हर एक हिंदू के जीवन का अंग है

राम मानवता का वो उदाहरण है जिसे अंकित करना मेरे जैसे छोटे-मोटे लेखक की बस की बात नहीं फिर भी कोशिश करता हूं

भगवान श्रीराम से बहुत कुछ सीखा जा सकता है,

भगवान श्रीराम से “दृढ़-निश्चयता” सीखा जा सकता है, राम वह दृढ़ संकल्प का नाम है जो सिर्फ अपने पिता के बात रखने के लिए 14 साल तक बनवास में जाने का निर्णय लिया और बिना किसी शर्त निर्वाहन किया

मैं तो सिर्फ यह सोचकर हैरान हो जाता हूं कि कैसे सिर्फ एक वचन के लिए इतना कष्ट झेलने को तैयार हो गए थे, आजकल के इंसान की बस की बात नहीं

राम सिर्फ एक अच्छा बेटा ही नहीं रहे, एक बेहतरीन भाई भी साबित हुए, उनके और लक्ष्मण के भाईचारा तो जगजाहिर है, लेकिन उन्होंने भरत से भी कभी कोई भेदभाव नहीं रखा जिन्हें उनके प्रतिद्वंदी के रूप में अयोध्या के राजा बनने की पेशकश भी की गई थी

वह हमेशा अपने आचरण से अपने भाइयों के आदर्श रहे हैं और शायद यही कारण है कि भारत में अभी भी भाइयों के बीच ऐसी भाईचारा देखने को मिलती है

मेरे दिमाग में शायद यही कहानी समाई हुई हैं इसलिए छोटा होने के नाते अपने बड़े भैया को हमेशा राम की तरह मानता हूं और वह भी राम की तरह धर्म निभाने में कभी पीछे नहीं हटे

इसलिए अगर राम को समझ लिया जाए तो रामायण हर घर की कहानी बन सकती हैं

राम के बारे में गलत धारणा सुनने को मिलती है कि वह सीता मैया के प्रति थोड़ा सा कठोर भाव रखे थे लेकिन मैं इसका पूर्णरूपेण खंडन करता हूं

राम के जीवन को ध्यान से देखा जाए तो जो भी महत्वपूर्ण घटना घटित हुई वह सीता मैया के कारण ही घटित हुई

वह कभी भी सीता मैया का अनादर नहीं किए जहां तक किसी दूसरे के बात में आकर सीता मैया से अलग होने की जो बात है इसके पीछे समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देना था

वह यह कि पति-पत्नी के इस नाजुक रिश्ते में कभी किसी बाहरी या अन्य व्यक्ति के बात में नहीं आना चाहिए

राम ने तो प्रचंड रावण से सीता के कारण हीं लड़ाई किया

ram ki kahani

श्री राम की कहानी के हर एक पात्र से सीखने को मिलता है, राम के संपर्क में जो भी लोग आए उनका जीवन धन्य हो गया

चाहे वह शबरी, विभीषण या फिर महाशक्तिशाली “वीर हनुमान

राम में एक अद्भुत गुण था उनके शरण में जो भी आते थे उनके शरणार्थी बनकर रहने लगते थे

इसका सबसे बड़ा उदाहरण परम वीर बजरंगबली रहे हैं, हनुमान जी के तो हृदय में ही राम बसते थे, उनका परिचय ही राम से शुरू होता था, हनुमान के वफादारी का उदाहरण देश-दुनिया में दिया जाता है

हनुमान के लिए लंका की कहानी खत्म करना कोई बड़ी बात नहीं था, इसका उदाहरण उन्होंने लंका-दहन में दिया भी था लेकिन क्योंकि वह भगवान राम के वफादार थे, उनके वचन का पालन कर रहे थे, इसलिए उन्होंने ऐसा ही काम किया जो श्रीराम ने उन्हें बताया

हनुमान जी राम को अपने आदर्श मानते थे और उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश भाग राम की सेवा में ही लगा दिया

राम की एक और बात मुझे अच्छा लगता है वह है उनके मुख पर छाया सदैव मुस्कान, बड़े से बड़ा रिस्क-मैनेजमेंट, डिजास्टर मैनेजमेंट से निपटने का यह बेहतरीन उपाय हैं

एक बात का जिक्र जरूर करना चाहूंगा जब रावण को राम ने मार गिराया तो लक्ष्मण से कहा कि जाओ उसके पैर के पास खड़े हो जाओ, लक्ष्मण को बड़ा अजीब लगा कि यह कैसे दुष्ट के पैर के पास मुझे जाने को कह रहे हैं

तब राम ने उन्हें समझाया कि रावण के अहंकार ने इसे गलत बनाया लेकिन यह एक प्रसिद्ध विद्वान भी है, इनकी बुराई लेने की जरूरत नहीं है – इनकी अच्छाई को अपने जीवन में अपनाएं, राम का यह बात तो “लाइफ-मैनेजमेंट” का ज्ञान देता है

मेरे शब्द अपने आप बनते जा रहे हैं, यह लेख और भी बड़ा बन सकता था लेकिन समय के अभाव के कारण इसे यहीं विराम देता हूं

आशा करता हूँ आपको लेख अच्छा लगा होगा और जो सीख बताई गई उसे आप अपने भीतर अपनाएंगे

आपके बेहतर स्वास्थ्य की कामना करता हूं

जय श्री राम