June 14, 2020

कही देर न हो जाए..

By अभय रंजन

अगर कोई किसी भी कारण से आत्महत्या करता है
अच्छे नंबर नहीं ला पाना, प्यार में धोखा खाना, ठीक ढंग से ब्यापार न चल पाना या किसी के द्वारा किए हुए अपमान को न सहन कर पाना

तो समाज या उसके लोग उसे कायर या उसके द्वारा कदम को कायरता का नाम देते हैं

लेकिन क्या इसके पीछे के कारण को कभी किसी ने समझा
जिससे यह हो ही ना

यह भी तो सत्य है कि कोई खुशी से खुदकुशी नहीं करता है, यह तो उस जद्दोजहद का परिणाम होता है जो वह रोज उन दिनों झेल रहा होता है

घर-परिवार, समाज के उम्मीदों के बोझ तले वो ऐसा दवा हुआ रहता है की अंत में उसको यही रास्ता सूझता हैं

कोई उससे अच्छा बनने की उम्मीद करता है

कोई उससे अच्छा दिखने की उम्मीद करता है

कोई उससे अच्छा पैसा कमाने की उम्मीद करता है

कोई उसे सरकारी नौकरी या सम्मानीय जॉब की उम्मीद करता है

कोई उससे अमीर बनने की उम्मीद करता है

और भी बहुत कुछ….

कुछ लोग तो अपने मेहनत और अपने जिद के कारण इन उम्मीदों पर खरा भी उतरते हैं

लेकिन कुछ लोग इसे सहन नहीं कर पाते हैं और वह इन रास्तों को चुनते हैं

(हालाँकि, मैं इस तरह का कदम का कठोर बिरोध करता हूँ)

लेकिन मैं इस विषय पर खुलकर बात करने को तैयार हूं और इसका समाधान देने को भी तैयार हूं

देखिये, जरूरत और क्षमता से ज्यादा उम्मीद कभी-कभी लोगों को गलत राह चुनने को विवश कर देता है

क्योंकि इस परिस्थिति में इंसान उस काम को भी करना शुरू कर देता है जो वह कभी करना नहीं चाहता

खुदकुशी इन्हीं में से एक है

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लेकिन मैं इसके दोनों पहलू पर बात करना चाहूंगा

कायरता सिर्फ उसी की नहीं है जिसने कदम उठाया है

कायरता हर उस इंसान की है जिसने उसे यह कदम उठाने पर मजबूर किया

क्योंकि अगर आप में जरा भी सकारात्मक सोच या उर्जा रहता तो वह आपका साथ छोड़ कर जाने का कदम कभी नहीं उठाता

यहां पर आपकी कायरता साफ झलकती है

इससे बड़ा दुर्भाग्य उस व्यक्ति के लिए और क्या हो सकता है कि उसके सर्कल में एक भी ऐसा व्यक्ति नहीं था जो उसको जीने का मतलब समझा जाए या उसको जीने का एक कारण दिखा जाए

अब सवाल उठता है कि इसे रोका कैसे जाए

इसे एक सकारात्मक सोच से रोका जा सकता है और उसकी शुरुआत सबसे पहले खुद से करनी होगी, सबसे पहले आपको एक सकारात्मक सोच रखना होगा क्योंकि जैसा आप सोचेंगे वैसा ही आप सामने वालों को प्रतिक्रिया देंगे जिसका उसके जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ेगा

इसलिए अपने जुबान से गंदगी उगलने से पहले हज़ार बार सोचे

इसे अपने जीवन में अपनाना तो और भी आसान है

आप आज से, अभी से प्रण ले कि मैं किसी को भी नकारात्मक बात नहीं कहूंगा

अपनों के हर छोटी-मोटी सफलता को उत्सव के तरह मनाए और मुसीबतों में बिल्कुल चट्टान की ढाल की तरह डटे खड़े रहे

अगर ऐसा हुआ तो बाद में अफ़सोस करने की जरूरत नहीं पड़ेगी

नहीं तो ऐसे ही सोशल मीडिया पर #RIP पोस्ट करते रह जायेंगे

किसी का जाना बाकई में दुखद होता इसलिए संभाले

जय हिन्द