January 14, 2019

मकर सक्रांति – पतंग, उत्साह और उड़ान

By अभय रंजन

जी हां, बिलकुल सही, आज मकर सक्रांति है

एक त्यौहार जो पतंग की उड़ान से मिलने वाली उत्साह के रूप में मनाई जाती है, इसलिए मैंने इस लेख का शीर्षक “मकर सक्रांति – पतंग, उत्साह और उड़ान” रखा

देश के कई प्रांत में लोग इस पर्व को अलग-अलग तरीके से मनाते हैं

कहीं पतंग उड़ा कर खुशी जाहिर की जाती है, तो कहीं दही-चूड़ा एवं तिलकुट खाकर पर्व को मनाया जाता है, कहीं गंगा में स्नान करके इस पर्व का शुरुआत करते हैं और कहीं फसल काटने के प्रथम दिन के रूप में मनाया जाता है

भले ही तरीका अनेक है पर मकसद एक ही है सुख-समृद्धि, खुशियां और एकता स्थापित हो

क्योंकि मैं बिहार से हूं तो हमारे यहां तिल से बने विविध तरह के पकवान (तिलकुट) आज के दिन खाए जाते हैं

गुजरात और राजस्थान में पतंगे बहुत जोश के साथ उड़ाई जाती है

दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक मेला “प्रयागराज कुंभ मेला” उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 49 दिन चलने वाला है जिसकी शुरुआत भी मकर सक्रांति से होगी

(कुंभ मेला पर भी मैं एक बहुत ही अच्छा लेख आप के बीच में लाऊंगा, बने रहे)

सच बताऊं जब मैं भारत की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति को निहारता हूं तो गर्व से फूले नहीं समाता हूं

पूरे विश्व में अगर सबसे ऐतिहासिक, अद्भुत और प्रेरणास्रोत अगर किसी की संस्कृति है तो वह हमारी भारत की है

हम सब भारतीय को इसे अपनाते हुए, इस पर नाज करना चाहिए, और इसका प्रचार-प्रसार करना चाहिए

मुझे तो हर पर्व कुछ ना कुछ सिखाता है और इस पर मैं पहले भी लिख लिख चुका हूं

(यहां से आप पढ़ सकते हैं bit.ly/2RqLBAz)

आज जब लोगों के शोर शराबे ने मुझे सुबह उठाया तो एक अजीब सी वातावरण अनुभव करने को मिला

आज की हवा में कुछ अलग बात थी

लोग बहुत धूमधाम से मकर संक्रांति मनाना शुरू कर दिए थे

क्योंकि मैं जयपुर में रहता हूं तो यहां बिल्कुल अनोखे तरीके से धूमधाम से लोग मकर सक्रांति मनाते हैं, जो मुझे भी बहुत पसंद है

यहां के लोग डीजे की धुन, हवा में तैरती पतंगों की उड़ाने, और स्वादिष्ट भोजन के साथ यह पर्व मनाते हैं

यहां पतंगबाजी बिल्कुल उच्च स्तर की होती है लोग एक दूसरे को पतंग के काटने मैं अलग ही दिलचस्पी रखते हैं और जब इस में सफल हो जाते हैं तो एक अलग ही उत्साह भरी आवाज एक साथ कानों को सुनाई पड़ता है

कमरे से बाहर निकल कर जब आसमान में देखा तो कई पतंगे अपनी उड़ान भर रही थी

ठीक उसी समय मेरे दिमाग में एक बात आई, यह पतंग हमें कुछ बताना चाह रहा है

और जिंदगी को संवारने के लिए यह जानना बहुत ही ज्यादा जरूरी है

इस पतंग से बहुत कुछ सीखा जा सकता है

जैसे कि हम जीवन में कितनी भी ऊंची उड़ान भर ले, हमारी आधार जो कि एक डोर के रूप में औरों के हाथ में होती है और उनसे जुड़ा होता है

पतंग के दोनों सिरों पर डोर बांधी जाती है जो यह सिखाती है कि अगर सही अनुपात से इसे बांधा नहीं गया तो कितना भी अच्छा पतंग या डोर हो उड़ान नहीं भर पाएगी

चकरी में बंधी डोर या मांझा यह सिखाती है कि जीवन की डोर को सही से व्यवस्थित नहीं रखा तो उलझ भी सकती है और फिर उसको सुलझाने में काफी मशक्कत भी करना पड़ सकता है

और कटी पतंग हमें यह सिखाता है कि अगर आपके जीवन का डोर आप से छूट जाता है तो वो कहां जाकर गिरेगी इसका कोई अंदाजा नहीं है

इसलिए आप सबों से यही अनुरोध है कि जोश के साथ पतंग तो उड़ाइए पर साथ में इसके महत्व को भी समझे

ध्यान रहे

Makar sakranti

आशा करता हूं कि कुछ सीखने को मिला होगा

आपको और आपके परिवार को मकर सक्रांति की ढेर सारी शुभकामनाएं

आगे और लेख लाते रहूंगा

जय हिंद

आपका अपना

अभय रंजन