March 8, 2019

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष | International Women Day Special

By अभय रंजन

सबसे पहले उन सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं, जो इस दिन की अहमियत को समझते हैं, और जो इसे मनाते हैं

आज इसी का परिणाम है कि हमारे समाज में आज के दौर में महिला भी कदम से कदम मिलाकर हर क्षेत्र में आगे बढ़ते दिख रहे हैं

आज सुबह से ही व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर लोगों के महिला के प्रति सम्मान, सहानुभूति तथा समर्थन के बहुत सारे मैसेजेस आ रहे थे

इससे साफ झलकता है कि आज के समाज में महिला की कद्र की जा रही है, जो कि एक बहुत ही सराहनीय कार्य है

संभवत: औरत के लिए हमारी परंपरा में सर्वाधिक प्रचलित तीन शब्द हैं- स्त्री, नारी और महिला

इनमें भी हमारी बोलचाल में ‘स्त्री’ और ‘महिला’ शब्द सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं

मैं इन शब्दों की उत्पत्ति या अर्थ में ज्यादा गहराई से जाना नहीं चाहता क्योंकि हमें इनके अस्तित्व को समझना ज्यादा जरूरी हैं

सबसे पहले तो यह बताएं कि नारी या महिला शब्द सुनते ही आपके दिमाग में क्या आता है

मेरे जेहन में तो “नारी” मतलब समर्पण, सद्भावना और सामर्थ आता है

मैंने तो ताउम्र अधिकांश महिला या नारी को इसी रूप में देखा है

Mahila Diwas

पर असल में नारी क्या होती हैं?

नारी वह होती है जो खुद सह लेगी लेकिन दूसरे को कष्ट नहीं होने देगी

नारी वह होती है जो अपने पूरे परिवार की पालन-पोषण की जिम्मेदारी खुद ही निभाती है

नारी वह होती है जो खुद के लिए कभी किसी चीज की शिकायत नहीं करती है

नारी वह होती है जो खुद भूखा सो लेती है लेकिन अपने बच्चों को भरपेट खाना खिलाती है

नारी वह होती है जो अपने पति को परमेश्वर मानती है और उनके हर फैसले में बराबर का साथ देती है

नारी वह होती है जो अपनों से बड़ों को भरपूर सम्मान तथा आदर देती है और छोटों को ढेर सारा प्यार देकर पूरे परिवार को एक साथ जोड़ कर रखती है

अगर आपके घर-परिवार, आस-पड़ोस, समाज में में कोई इस तरह का नारी मिले तो मेरी यह आपसे विनती है कि आज उनको नमन जरूर करना

जहां आज पूरा विश्व नारी के सम्मान में कुछ ना कुछ बोल रहा है, मैं भी कुछ बोलना चाहता हूं

मेरा भी जीवन संवारने में एक महिला का पूरा हाथ है

वो कहते हैं ना कि एक हर एक सफल आदमी के पीछे एक नारी का हाथ होता है, मैं तो अभी सफलता का पैमाना तय नहीं किया हूं लेकिन जो भी थोड़ा बहुत ज्ञान आया है, इसके पीछे मेरी मां का योगदान है

उन्होंने मेरी पढ़ाई, परवरिश और संस्कार सिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी

अगर आज मैं इस विषय पर बात करने लायक बना तो भी इसमें उनका ही योगदान है

वैसे तो मेरी मां पेशे से शिक्षक है, इस क्षेत्र में लोगों को थोड़ा सा कठोर होना पड़ता है, लेकिन मेरी मां दिल से बहुत निर्मल है, सारे बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार रखती है

कई बार उनके द्वारा शासित स्कूल को प्रखंड का बेहतरीन स्कूल का पुरस्कार मिल चुका है

मैं उनसे बहुत कुछ सीखता हूं

पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में समन्वय बनाना, मैं उन्हीं से सीखा हूं, पिछले कई सालों से वह घर की जिम्मेदारी के साथ-साथ स्कूल को भी बहुत अच्छे से चला रही हैं, जो कि वाकई में काबिले तारीफ है

इसके लिए उन्हें समाज में बहुत इज्जत मिलती है और और वह समाज के लिए एक बेहतरीन उदाहरण भी है

मैं तो कहता हूं कि हर एक लड़की को उनसे सीख लेनी चाहिए

क्योंकि आज के दौर में महिला की सफलता सिर्फ इसमें नहीं है कि आप पर्सनल या प्रोफेशनल लाइफ में अच्छा कर पाए हो, सफलता इसमें है आप दोनों को किस कदर समन्वय करके चल रहे हैं

मेरी मां अपने बलबूते बहुत संघर्ष की, बहुत छोटी जगह से छोटी संसाधन के साथ उन्होंने जीवन के संघर्ष को झेलते हुए आज सफलता के कई सीढ़ियों का सफर तय किया

और इस सफर में सबसे कमाल की बात, जो मुझे बहुत ज्यादा प्रभावित करता है, वह यह है कि वह कभी भी  हताश-निराश तथा उबी नहीं

वैसे तो मेरी मां की बहुत सारी खूबियां है, जिससे सीख मिलती है, लेकिन समय के अभाव के कारण वह किसी और दिन बताऊंगा

मैं अपनी मां की जीवनी किताब का शक्ल देकर जल्द ही प्रकाशित करूंगा, क्योंकि मुझे लगता है कि इनके जीवन से प्रेरणा के रूप में और भी लोगों को सीख मिल सकती है

Prabha kumari

मैं आज इस अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अपनी मां के साथ-साथ सारे महिला गण के सेहत की सलामती के लिए भगवान से प्रार्थना करता हूं

इस धरती लोक पर मौजूद तमाम नारी शक्ति को तहे दिल से प्रणाम करता हूं

अंत में मैं यही कहना चाहूंगा की आज इस अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर हम सब मिलकर यह प्रण ले की सभी महिला का सम्मान करेंगे