May 5, 2020

कोरोना – मेरे नज़र से

By अभय रंजन

हिंदी में एक शब्द है “औकात”

सामान्य तौर पर यह शब्द लोग आक्रोश में आकर इस्तेमाल करते है लेकिन मैं आज खुलेआम बोल रहा हूं – कोरोना ने सबकी औकात याद दिला दी 

अब कोरोना क्या है यह मुझे बताने की जरूरत नहीं है, यह वही है जो आपकी रातों की नींद और दिन का चैन छीन के रख रखा है, यह वही है जो आपको यह जानने पर मजबूर कर देता है कि अभी इससे कितने लोग ग्रसित हुए और कितनों की मौत हो गई

यह वही है जो आपको लगभग 2 महीने से आपके ही घर में कैद करके रख रखा है

कुल मिलाकर अगर मोटा-मोटी बोला जाए तो साफ तौर पर यह इंसान की बखिया उधेड़ रखा है

कहते हैं कि इंसान के पास दिमाग होता है जिसके कारण वह अन्य प्राणियों से भिन्न होता है

लेकिन कभी-कभी इसी दिमाग में लोग गलतफहमी पाल लेते हैं

नवाजुद्दीन सिद्दीकी का एक फेमस डायलॉग है कि “कभी-कभी अपुन को लगता है कि अपुन ही भगवान है”

लेकिन शायद इंसान इसे कुछ ज्यादा ही गंभीर ले लिया और इसको सही मानने लगा

लेकिन भविष्य में आपकी विफलता इस बात से जानी जाएगी कि एक अदृश्य वायरस ने आपकी ऐसी-तैसी कर के रख दिया

यहां पर आपकी साइंस, टेक्नोलॉजी, मेडिकल घुटने टेकते नजर आ रहा है क्योंकि अभी तक कोई एक वैक्सिंग तैयार नहीं किया गया है जो इसको खत्म कर सकें

मैं तो इसे कुदरत का प्रकोप मानता हूं, इंसान आज पशु-पक्षी, जीव-जंतु तथा अन्य प्राणियों पर इतना हावी हो गया कि उन्हें बिल्कुल भी जीने का मौका नहीं दे रहा

तब कुदरत ने एक पलटवार किया, आज वह खुलेआम सड़कों पर, खेतों में, जंगलों में घूम रहे हैं और हम चारदीवारी के अंदर कैद है

बाकी सब को तो छोड़े, इंसान आज मालवीय मूल्यों को ताखा पर रखकर एक दूसरे को ही लपेटने में लगा हुआ है

अब इन सब के बीच बहुतो के चेहरे सामने आए

जिसमें से कुछ बड़े-बड़े दानी हैं, कुछ बड़े-बड़े मंत्री है, कुछ बड़े-बड़े कंपनी के मालिक हैं और एक बड़ी संख्या में इन सब की बातों पर आंख बंद करके विश्वास करने वाला मूर्ख जनता

मैं यहां पर उन जनता को मूर्ख से संबोधित कर रहा हूं जो अपना दिमाग बिल्कुल नहीं लगाता, सोशल मीडिया या टीवी पर जो उन्हें बता दिया जाता है उसी को वह सच मान लेता है

बैसे बता दूँ यह वो ही जनता है जिनको नोट बंदी के समय लाइन में खड़ी होने पर दिक्कत आ रही थी, आज दारू के चक्कर में लम्बी क़तर का हिस्सा बन रहे हैं

आज इन सब पर बहुत सारे सवाल खड़े होते हैं

आज तमाम मंत्री गण की कुशलता पर सवाल उठता है जो ट्यूटर पर अपने आप को मसीहा बताकर रोज पोस्ट शेयर कर रहे हैं

क्या आपके क्षेत्र में एक-एक नागरिक स्वास्थ्य है ?

क्या उनका तरीके से ख्याल रखा जा रहा है ?

क्या आप उन तमाम जगहों पर जा रहे हैं जहां पर यह व्यवस्था की जा रही है यह सिर्फ अपने एसी रूम से ट्वीट ही कर रहे हैं

हमारे सारे नेता जी को मजदूरों की चिंता 1 मई मजदूर दिवस को ही क्यों दिखी

क्या यह पॉलिटिकल ड्रामा नहीं रहा

क्या इससे पहले आपको मजदूरों की चिंता नहीं सता रही थी

खैर, नेतागण का तो यह स्वभाव काफी स्वभाविक है

मैं जब पैदल घर जाते मजदूरों का फोटो देखता हूं तो मुझे इन कंपनियों के बड़े-बड़े मालिकों पर भी सवाल करने का मन होता है

धिकार है तुम्हारे कंपनी पर जो मुश्किल समय में अपने मजदूरों को ही बेरोजगार कर दिया, एक-दो महीने में ही तुम्हारी औकात दिख गई

हो सकता है तुम्हारे कंपनी फिर से खड़ा हो जाए, लेकिन बो गरीब असहाय मजदूर का मनोबल कभी भी दोबारा तुमसे जुड़ने का नहीं होगा

पीएम रिलीफ फंड में पैसा देने के बजाय अगर अपने पास काम कर रहे लोगों को मदद कर देते तो इससे बड़ा दान ही नहीं होगा

क्योंकि वहां तो पैसा सही तरीके से जाएगा या नहीं कोई नहीं जानता, यहां तो आप उनको मदद कर पा रहे हैं जो आपकी सेवा पिछले कई सालों से लगातार करते आ रहा है

लोग अपने स्तर से अपने आसपास ही अगर चीजों को संभाल लेते तो ज्यादा अच्छा होता

लेकिन यहां तो दान करते बात चाहे तो सेल्फी लेनी है या स्क्रीनशॉट लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करना है

मैं किसी डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, सफाई कर्मचारी या पुलिस वालों को ऐसा करते नहीं देखा है और असल में कोरोना के असली हीरो यही सब है

बाकी तो 5 के 50 बताने वाले लोग है

हालांकि कोरोना ने बहुत सारे सबक सिखा दिया,

अभी भी इंसान अगर आत्ममंथन करके नहीं सुधरता है तो वह उसकी सबसे बड़ी भूल होगी

सब कुछ यहां धड़ा का धड़ा ही रह जाएगा और एक झटके में कोई भी एक अदृश्य चीज आपका सब कुछ उड़ा के ले जाएगा

इसलिए सब कुछ सामान्य होने के बाद ज्यादा शानपति मत करना

जीयो और जीने दो

आशा करता हूं बात समझ में आ गई होगी अगर नहीं आई होगी तो पर्सनल मैसेज करो वहां पर डिटेल में बात करूंगा

अंत मे यही कहूँगा, कोरोना अभी तक ख़त्म नही हुआ इसलिए सतर्क रहे, सुरक्षित रहे

अपना और अपने परिवार का ख्याल रखें

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